काजू की खेती कहां और कैसे होती है। Cashew Cultivation
काजू की खेती कहां और कैसे होती है प्राकृतिक खेती 2021Cashew Cultivation
भारत में काजू की खेती दक्षिण भारतीय राज्यों में और पूर्वोत्तर भारत पहाड़ी इलाकों में की जाती है और छत्तीसगढ़ के बस्तर झारखंड इलाकों में भी काजू की फसल अत्याधिक मात्रा में ली जाती है।
काजू की उत्पत्ति ब्राजील में हुई है भारत में पुर्तगाल से 1570 के वर्षों में भारत में लगाई गई है और आज भारत विश्व का तीसरे नंबर का उत्पादक देश है चाय पत्ती कॉपी के बाद काजू विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाली फसल है
काजू को मिठाई ,खीर बनाने में और स्नेक के रूप में इसका सेवन की जाती है 1 किलो काजू का मूल्य ₹1000 तक मार्केट में मिलता है।
काजू के लिए कौन सी जलवायु उपयुक्त है। काजू की खेती की जानकारी।Which climate is suitable for cashew. cashew farming information
काजू उष्णकटिबंधीय पौधा है और उच्च तापमान में उग सकता है ।काजू के लिए आदर्श तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से 30 डिग्री सेल्सियस तक उत्तम है। यह एक मध्यम आकार का पेड़ है। और सालाना वर्षा 1000 मिली मीटर से 2000 मिलीमीटर तक की आवश्यकता काजू के पेड़ के लिए आवश्यक है। यह काजू की खेती की जानकारी है
काजू की फसल के लिए कौन सी मिट्टी उपयुक्त है?।Which soil is suitable for cashew crop?
काजू की खेती लाल बलुआ दोमट मिट्टी में आसानी से हो जाती है लैंड राइट तथा तटीय रेतीली मिट्टी भी जिसका पी एच हल्का अम्लीय हो। काजू की खेती के लिए सर्वोत्तम होती है। काजू की खेती पथरीली पहाड़ी नुमा किसी भी भूमि में आसानी से की जा सकती है ।छत्तीसगढ़ के बस्तर में वन विभाग द्वारा हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में काजू का जंगली विधि द्वारा जंगल में रोपण की गई है। आज बस्तर के काजू विदेशों में निर्यात की जाती है।
काजू की पौधा प्रति हेक्टर कैसे लगाएं। How to plant cashew plant per hectare
एक हेक्टेयर काजू लगाना हो तो काजू लंबाई और चौड़ाई दोनों तरफ 7 मीटर की दूरी में लगाई जा सकती है। और गड़े खनन हेतु 40 सेंटीमीटर लंबाई चौड़ाई गहराई में गड्ढे तैयार करनी चाहिए ।काजू के पौधे नर्सरी में जुलाई अगस्त के महीने में तैयार कर बरसात के महीने में ही खेत में काजू के पौधे लगा देनी चाहिए ।और निरंतर 2 से 3 वर्ष तक काजू के पौधे की जल प्रबंधन कटाई छटाई और खरपतवार का सही निदान प्राकृतिक विधि से करें । इस तरह काजू की खेती की जानकारी किसानों को होनी चाहिए
काजू के पौधे से काजू गिरी का उत्पादन। काजू की खेती से लाभ।Production of cashew kernel from cashew plant. Benefits of cashew cultivation
काजू के पौधारोपण के तीसरे वर्ष से काजू का उत्पादन शुरू हो चुका रहता है। काजू में काजू के फल और गिरी साथ ही साथ लगते हैं। फल का उपयोग जैम जेली बनाने हेतु की जा सकती है। अत्याधिक मात्रा में खाने से कसैला होने की वजह से फल का सेवन ज्यादा नहीं करना चाहिए और काजू गिरी का संग्रहण फल के झड़ते समय कर ली जाती है। यह मार्च-अप्रैल का महीने में इन काजू गिरी को किसान संग्रहित करता है। इस तरह से काजू की खेती से लाभ ली जा सकती है
प्रति पेड़ 10 किलो से 25 किलो तक काजू गिरी का उत्पादन लिया जा सकता है। 1 किलो काजू गिरी में ढाई सौ ग्राम तक की काजू का उत्पादन मिल जाता है। काजू गिरी में CNSL ज्वलनशील एसिड पाई जाती है इस वजह से काजू निकालने का प्रोसेस बड़ी-बड़ी कंपनियों में अत्याधुनिक मशीन द्वारा की जाती है। इस तरह से काजू की खेती से लाभ मिलती है
मिश्रित खेती में काजू की खेती का अतिरिक्त आमदनी कमाए।Earn extra income by cultivating cashew in mixed farming
काजू की असीम संभावनाएं आज भी है। खेती किसानी में मिश्रित खेती में काजू की खेती कर अतिरिक्त आमदनी कमाई जा सकती है। भारत पूरे विश्व का 23% उत्पादन करता है। 2 से 3 वर्ष की देखरेख उपरांत काजू की खेती कर लाखों में आय अर्जित की जा सकती है। और यह 15 से 20 वर्षों तक निरंतर उत्पादन देने वाली फसल होने की वजह से खेती किसानी में भरपूर लाभ मिल जाता है।
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